सिस्टर इन लॉ सेक्स कहानी में पढ़ें कि शादी के कई साल बाद मैं बीवी की चूत चोदकर बोर हो गया था। तभी मेरे साले की शादी हुई. वो मासूम लड़की मेरे दिल में उतर गयी.

नमस्कार दोस्तो! मैं कोमल मिश्रा अपनी एक नई कहानी में अपने सभी पाठकों का स्वागत करती हूं।
आप लोग मेरी सभी कहानियों को इतना पसंद करते हैं उसके लिए आप सभी का धन्यवाद।

मेरी पिछली कहानी
देसी कामवाली की चुत चुदाई का मजा
को पढ़कर मेरे एक पाठक ने मुझे मेल किया और पूछा कि आप ये सब कहानियां कहाँ से लाती हैं?

तो पाठकों को मैं बता देना चाहती हूं कि आप लोगों की तरह ही मेरे हजारों पाठक हैं जो मेरी कहानियां पढ़ते हैं।
उनमें से कई पाठक ऐसे हैं जो नियमित रूप से मुझसे चैट करते हैं और अपनी-अपनी कहानियां लिखकर मुझे भेजते हैं।
उनमें से जो कहानी मुझे पसंद आती है और मुझे वो सत्य लगती है तो उस कहानी को मैं आगे अन्तर्वासना में भेज देती हूं।
इससे आप लोगों को एक अच्छी कहानी पढ़ने का मौका मिलता है।

कई लोगों ने मुझसे पूछा है कि क्या मैं कोई लड़का हूँ?
तो उन लोगों को बस इतना ही कहना है कि मैं एक लड़की ही हूं।
और अगर मैं लड़का होता और लड़की बनकर कहानी भेजता तो इसमें मुझे क्या कोई फायदा होता।

मैं एक लड़की ही हूं और मुझे झूठ बोलने का कोई शौक नहीं है।
मेरे कुछ पाठक हैं जिनसे मैं मिल भी चुकी हूं।

तो दोस्तो, आगे बढ़ते हैं और चलते हैं आज की कहानी की तरफ!
आज की जो कहानी मैं आप लोगों तक भेज रही हूं वह मेरे पुराने पाठक ने भेजी है।
उनका नाम रवि कुमार है और उन्होंने अपनी पहचान गुप्त रखी है।

इनकी सिस्टर इन लॉ सेक्स कहानी मुझे काफी रोचक लगी और मैं खुद सोच में पड़ गई कि दुनिया में कभी कभी ऐसी भी घटना हो जाती है जिससे कि लोगों की चाहत पूरी हो जाती है।

तो दोस्तो, चलते हैं उनकी कहानी में!

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम रवि कुमार है। मैं कहाँ से हूं, ये तो नहीं बता सकता लेकिन आज मैं आप लोगों के साथ अपनी जिंदगी की एक ऐसी घटना को बताने जा रहा हूँ जिसके बाद मेरी दुनिया ही बदल गई।

आप लोगों ने चांद को जरूर देखा होगा लेकिन उस चाँद को हासिल नहीं किया होगा।
बस मेरी कहानी भी ऐसी ही है जिसमें मैंने चाँद को हासिल कर लिया।

मेरी वर्तमान उम्र 38 साल है और मैं एक सरकारी कर्मचारी हूँ।
साल 2007 में मेरी शादी हुई थी।

मेरे ससुराल में सास-ससुर के अलावा एक छोटा साला था जो उस समय स्कूल में पढ़ रहा था।
2012 तक मेरे दो बच्चे हो गए थे और मेरी जिंदगी बिल्कुल खुशहाल तरीके से चल रही थी।

दोस्तो, मैं हमेशा से ही एक कामुक प्रवृत्ति का आदमी था। औरतों को देखते ही मेरे अंदर उनके प्रति गंदी गंदी भावनाएं आने लगती थीं।

शादी के इतने साल बाद मेरा मन अपनी बीवी से भर चुका था और हम दोनों के बीच कभी कभी ही चुदाई होती थी।
इसलिए बाहर की औरतों को देखकर मेरा मन लालच से भर जाता था।
कोई नई नवेली दुल्हन हो, या कोई औरत, या फिर कोई कॉलेज की कमसिन हसीना … उन्हें देख उनके बदन की बनावट नापने लगता था।

खासकर कॉलेज की लड़कियों को देख मेरा मन ज्यादा ही उतावला हो जाता था।
जब कोई लड़की जांघों और गांड से चिपकी हुई जीन्स पहनकर निकलती तो उसके पिछवाड़े पर मेरी गंदी निगाह टिक जाती।

मैं किसी बाहर की औरत के साथ चुदाई करना चाहता था लेकिन कभी भी मुझे ऐसी कोई मिली नहीं।

धीरे धीरे मेरा साला बड़ा हो गया और उसकी भी शादी का समय आ गया।

मेरे ससुराल में हमेशा मुझे काफी मान सम्मान मिलता था क्योंकि मैं एक सरकारी पद पर था।

एक दिन मेरे ससुर ने मुझे फोन किया और मुझे बताया कि बेटे के लिए लड़की देखने चलना है इसलिए आप आ जाइये।

दोस्तो, मेरा साला बिल्कुल बेवकूफ किस्म लड़का था जिसे कुछ आता जाता नहीं था। दिनभर घर का काम करना और घर पर पड़े रहना उसकी दिनचर्या थी।
वो दिखने में भी किसी गाँव देहात के लड़के जैसा था, जिसे न कपड़े पहनने का शऊर, न चलने फिरने का शऊर।

मैंने सोचा कि पता नहीं किस लड़की की किस्मत फूट गई जो इससे शादी करने वाली है।

खैर कुछ भी था, दो दिन के बाद मैं अपने ससुराल पहुंच गया।

अगले दिन ही हम सब लड़की देखने के लिए चले गए।

लड़की वालों के यहाँ पहुँचकर हम सब सामने वाले कमरे में बैठे हुए थे।
हम सब उनके घर के लोगों से बातचीत कर रहे थे।

कुछ देर बाद जिस लड़की को हम लोग देखने आए थे वो नाश्ता लेकर सामने आई।
उस लड़की को देखकर मेरी आँखें उसपर ही टिक गईं। मैं बस उसे ही देखता रह गया।
उसे देखकर ऐसा लग रहा था जैसे वो हल्दी के पानी से नहा कर आई हो।

अब आप समझ सकते हैं कि वो कितनी गोरी रही होगी और उसका चेहरा बिल्कुल किसी गुड़िया की तरह था।
बिल्कुल छरहरा बदन, 28 साइज के छोटे छोटे उसके स्तन और पतली कमर।
ऐसा लग रहा था जैसे उसे ऊपर वाले ने बड़ी फुर्सत में बनाया था।

उसे देखकर मेरे मन में एक ही ख्याल आया कि मेरा साला इस लड़की के बिल्कुल भी काबिल नहीं है और इन दोनों की जोड़ी बिल्कुल हूर और लंगूर जैसी लगेगी।

मैं तो एक ही नजर में उस लड़की पर फिदा हो गया था।
वो हम सब को नाश्ता देकर जाने लगी लेकिन हम लोगों ने उसे बैठने के लिए कहा और वो बैठ गई।